मेरी पाँच नमाज़ें
जानो कि फ़ज्र, ज़ुहर, अस्र, मग़रिब और इशा कब पढ़ते हैं।
किसी नमाज़ पर दबाओ और जानो कि उसे कब पढ़ते हैं।
- रकअतें:
- कब?
- सारी रकअतें:
अल्लाह फ़रमाता है: “बेशक नमाज़ ईमान वालों पर तय वक़्तों पर फ़र्ज़ है।” (सूरह अन-निसा 4:103)
क़दम-ब-क़दम नमाज़ पढ़ना सीखो। पहले हनफ़ी तरीक़ा दिखाया गया है, फिर दूसरे मसलकों में क्या फ़र्क़ है।
किस नमाज़ में कितनी रकअतें?
| नमाज़ | कुल |
|---|
🕌 जुमे के दिन ज़ुहर की जगह: 4 सुन्नत · इमाम के साथ 2 फ़र्ज़ · 4 सुन्नत · 2 सुन्नत · 2 नफ़्ल।
क़दम-ब-क़दम: 2 रकअत नमाज़
खोलने के लिए किसी क़दम पर दबाओ।
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1तैयारी
वुज़ू करो। साफ़ कपड़े पहनो, साफ़ जगह चुनो और क़िबला (काबा) की तरफ़ मुँह करो।
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2नीयत
दिल में तय करो कि कौन-सी नमाज़ और कितनी रकअतें पढ़ रहे हो। ज़बान से कहना ज़रूरी नहीं।
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3तकबीरे तहरीमा
दोनों हाथ कानों तक उठाओ (लड़कियाँ: कंधों तक) और कहो “अल्लाहु अकबर”। अब तुम नमाज़ में हो — कोई बात नहीं!
पढ़ो: اللّٰهُ أَكْبَرُ अल्लाहु अकबर -
4क़ियाम और सना
दायाँ हाथ बाएँ हाथ पर रखकर नाफ़ के नीचे बाँधो (लड़कियाँ: सीने पर)। सजदे की जगह पर नज़र रखो और धीरे से सना पढ़ो।
पढ़ो: سُبْحَانَكَ اللّٰهُمَّ وَبِحَمْدِكَ، وَتَبَارَكَ اسْمُكَ، وَتَعَالَىٰ جَدُّكَ، وَلَا إِلٰهَ غَيْرُكَ सुब्हानकल्लाहुम्मा व बिहम्दिका, व तबारकस्मुका, व तआला जद्दुका, व ला इलाहा ग़ैरुक। -
5क़िराअत
अऊज़ु बिल्लाह और बिस्मिल्लाह पढ़ो, फिर सूरह फ़ातिहा। धीरे से “आमीन” कहो, फिर कोई और सूरह, जैसे सूरह इख़्लास।
पढ़ो: أَعُوذُ بِاللّٰهِ مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ अऊज़ु बिल्लाहि मिनश्-शैतानिर्-रजीम। बिस्मिल्लाहिर्-रहमानिर्-रहीम। -
6रुकू
“अल्लाहु अकबर” कहकर झुको। हाथ घुटनों पर, कमर सीधी। 3 बार पढ़ो:
पढ़ो: سُبْحَانَ رَبِّيَ الْعَظِيمِ सुब्हाना रब्बियल अज़ीम -
7सीधे खड़े होना
पहला हिस्सा कहते हुए सीधे खड़े हो, फिर खड़े होकर दूसरा हिस्सा कहो।
पढ़ो: سَمِعَ اللّٰهُ لِمَنْ حَمِدَهُ رَبَّنَا لَكَ الْحَمْدُ समिअल्लाहु लिमन हमिदह। रब्बना लकल हम्द। -
8सजदा
“अल्लाहु अकबर” कहकर सजदे में जाओ। माथा, नाक, दोनों हाथ, दोनों घुटने और पैरों की उँगलियाँ ज़मीन पर। 3 बार पढ़ो:
पढ़ो: سُبْحَانَ رَبِّيَ الْأَعْلَىٰ सुब्हाना रब्बियल आला -
9थोड़ा बैठना
“अल्लाहु अकबर” कहकर दोनों सजदों के बीच सुकून से बैठो।
पढ़ो: اللّٰهُ أَكْبَرُ अल्लाहु अकबर -
10दूसरा सजदा
“अल्लाहु अकबर” कहकर फिर सजदा करो, 3 बार “सुब्हाना रब्बियल आला”। एक रकअत पूरी! “अल्लाहु अकबर” कहकर खड़े हो जाओ।
पढ़ो: سُبْحَانَ رَبِّيَ الْأَعْلَىٰ सुब्हाना रब्बियल आला -
11दूसरी रकअत
बिस्मिल्लाह, सूरह फ़ातिहा और कोई और सूरह पढ़ो, फिर रुकू, खड़े होना और दो सजदे — बिल्कुल पहली रकअत की तरह (इस बार सना नहीं)।
पढ़ो: بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ बिस्मिल्लाहिर्-रहमानिर्-रहीम -
12क़ादा: अत्तहिय्यात
दूसरे सजदे के बाद बैठकर अत्तहिय्यात पढ़ो। “ला इलाहा” पर दाएँ हाथ की शहादत की उँगली उठाओ।
पढ़ो: التَّحِيَّاتُ لِلّٰهِ وَالصَّلَوَاتُ وَالطَّيِّبَاتُ، السَّلَامُ عَلَيْكَ أَيُّهَا النَّبِيُّ وَرَحْمَةُ اللّٰهِ وَبَرَكَاتُهُ، السَّلَامُ عَلَيْنَا وَعَلَىٰ عِبَادِ اللّٰهِ الصَّالِحِينَ، أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلٰهَ إِلَّا اللّٰهُ، وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ अत्तहिय्यातु लिल्लाहि वस्-सलवातु वत्-तय्यिबातु, अस्सलामु अलैका अय्युहन्-नबिय्यु व रहमतुल्लाहि व बरकातुह, अस्सलामु अलैना व अला इबादिल्लाहिस्-सालिहीन, अश्हदु अल्ला इलाहा इल्लल्लाहु व अश्हदु अन्ना मुहम्मदन अब्दुहू व रसूलुह। -
13दुरूद और दुआ
नबी ﷺ पर दुरूद (दुरूदे इब्राहीम) पढ़ो, फिर कोई छोटी-सी दुआ।
पढ़ो: اللّٰهُمَّ صَلِّ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَعَلَىٰ آلِ مُحَمَّدٍ، كَمَا صَلَّيْتَ عَلَىٰ إِبْرَاهِيمَ وَعَلَىٰ آلِ إِبْرَاهِيمَ، إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ اللّٰهُمَّ بَارِكْ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَعَلَىٰ آلِ مُحَمَّدٍ، كَمَا بَارَكْتَ عَلَىٰ إِبْرَاهِيمَ وَعَلَىٰ آلِ إِبْرَاهِيمَ، إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ رَبَّنَا آتِنَا فِي الدُّنْيَا حَسَنَةً وَفِي الْآخِرَةِ حَسَنَةً وَقِنَا عَذَابَ النَّارِ अल्लाहुम्मा सल्लि अला मुहम्मदिंव व अला आलि मुहम्मद, कमा सल्लैता अला इब्राहीमा व अला आलि इब्राहीम, इन्नका हमीदुम मजीद। अल्लाहुम्मा बारिक अला मुहम्मदिंव व अला आलि मुहम्मद, कमा बारक्ता अला इब्राहीमा व अला आलि इब्राहीम, इन्नका हमीदुम मजीद। रब्बना आतिना फ़िद्दुनिया हसनह, व फ़िल आख़िरति हसनह, व क़िना अज़ाबन्नार। -
14सलाम
दाईं तरफ़ मुँह फेरकर सलाम कहो, फिर बाईं तरफ़ दोबारा। तुम्हारी नमाज़ पूरी हो गई! 🎉
पढ़ो: السَّلَامُ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَةُ اللّٰهِ अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह
3 या 4 रकअत की नमाज़
- 2 रकअत के बाद बैठकर सिर्फ़ अत्तहिय्यात पढ़ो, फिर “अल्लाहु अकबर” कहकर बाक़ी रकअतों के लिए खड़े हो जाओ।
- फ़र्ज़ नमाज़ की तीसरी और चौथी रकअत में सिर्फ़ सूरह फ़ातिहा। सुन्नत और नफ़्ल की हर रकअत में फ़ातिहा के साथ सूरह भी मिलाओ।
- आख़िरी क़ादे में अत्तहिय्यात, दुरूद और दुआ पढ़ो, फिर सलाम फेरकर नमाज़ ख़त्म करो।
- वित्र (हनफ़ी): एक सलाम से 3 रकअतें। तीसरी रकअत में सूरह के बाद “अल्लाहु अकबर” कहते हुए हाथ उठाओ और दुआ-ए-क़ुनूत पढ़ो, फिर रुकू में जाओ।
दूसरे मसलकों में फ़र्क़
चारों मसलक — हनफ़ी, शाफ़ई, मालिकी और हंबली — सब सुन्नत पर चलते हैं। बस कुछ छोटी बातों में फ़र्क़ है:
क़ियाम में हाथ
- हनफ़ी
- नाफ़ के नीचे बाँधते हैं।
- दूसरे मसलक
- शाफ़ई और हंबली: सीने पर या थोड़ा नीचे। मालिकी: अक्सर हाथ छोड़कर।
रफ़ा यदैन (हाथ उठाना)
- हनफ़ी
- सिर्फ़ पहली “अल्लाहु अकबर” पर।
- दूसरे मसलक
- शाफ़ई और हंबली: रुकू से पहले और बाद भी (शाफ़ई तीसरी रकअत के लिए उठते समय भी)।
“आमीन” कहना
- हनफ़ी
- धीरे से।
- दूसरे मसलक
- शाफ़ई और हंबली: ऊँची आवाज़ वाली नमाज़ों में ज़ोर से।
इमाम के पीछे
- हनफ़ी
- चुपचाप सुनो; सूरह फ़ातिहा मत पढ़ो।
- दूसरे मसलक
- शाफ़ई: ख़ुद सूरह फ़ातिहा पढ़ते हैं। मालिकी और हंबली: धीमी रकअतों में धीरे से पढ़ते हैं।
वित्र
- हनफ़ी
- वाजिब। 3 रकअतें, एक सलाम, रुकू से पहले क़ुनूत।
- दूसरे मसलक
- सुन्नत। अक्सर 2 रकअत + 1 रकअत, या सिर्फ़ 1; क़ुनूत आम तौर पर रुकू के बाद।
फ़ज्र में क़ुनूत
- हनफ़ी
- नहीं पढ़ते।
- दूसरे मसलक
- शाफ़ई और मालिकी: फ़ज्र में क़ुनूत की दुआ पढ़ते हैं।
आख़िरी क़ादा
- हनफ़ी
- बायाँ पैर बिछाकर उस पर बैठना, दायाँ पैर खड़ा।
- दूसरे मसलक
- दूसरे अक्सर ज़मीन पर बैठते हैं, बायाँ पैर दाईं टाँग के नीचे से निकालकर (तवर्रुक)।
ये सारे तरीक़े सही हैं। अपने माँ-बाप या उस्ताद से पूछो कि तुम्हारे घर में किस तरीक़े से नमाज़ पढ़ी जाती है। 🤍
कैसे खेलें
- सीखो: हर नमाज़ पर दबाओ और देखो कब पढ़ते हैं और कितनी रकअतें हैं।
- क्रम में लगाओ: सुबह से रात तक नमाज़ों पर दबाओ।
- क्विज़: 5 सवालों के जवाब देकर 3 सितारे तक पाओ।
- नमाज़ का तरीक़ा: क़दम-ब-क़दम नमाज़ पढ़ना सीखो।
- माता-पिता: अगली नमाज़ साथ पढ़ें!
आपका बच्चा क्या सीखता है
- पाँच नमाज़ों के नाम।
- हर नमाज़ का दिन में वक़्त।
- हर नमाज़ में कितनी फ़र्ज़ रकअतें हैं।
- हर नमाज़ में फ़र्ज़, सुन्नत, वित्र और नफ़्ल कितनी रकअतें।
- क़दम-ब-क़दम नमाज़ का तरीक़ा (हनफ़ी), और दूसरे मसलकों में फ़र्क़।
माता-पिता पूछते हैं
क्या यह आज की नमाज़ का वक़्त दिखाता है?
नहीं। यह क्रम और दिन का वक़्त सिखाता है। Islam Teaching ऐप तुम्हारे शहर का सही वक़्त दिखाता है।
नमाज़ का तरीक़ा किस मसलक के मुताबिक़ है?
पहले हनफ़ी तरीक़ा दिखाया गया है, फिर शाफ़ई, मालिकी और हंबली तरीक़ों में क्या फ़र्क़ है। सब सुन्नत पर चलते हैं।
यह किसके लिए है?
लगभग 4 से 10 साल के बच्चों और नमाज़ सीखना शुरू करने वालों के लिए।
खेलने के लिए और गेम्स
एक और मुफ़्त गेम के साथ मज़ा जारी रखें।
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